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ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों का विशेष स्थान है। ये नौ ग्रह सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। मान्यता है कि इन ग्रहों की चाल, स्थिति और इनके बीच का संबंध हमारे भाग्य, स्वभाव और जीवन की घटनाओं को निर्धारित करता है। आइए, आज इन्हीं नवग्रहों और उनके प्रभावों के बारे में विस्तार से जानते हैं। नवग्रह कौन हैं? सबसे पहले समझते हैं कि ये नवग्रह कौन-कौन से हैं: सूर्य (Sun): यह एक तारा है, जिसे ग्रहों का राजा माना जाता है। चंद्रमा (Moon): यह पृथ्वी का उपग्रह है। मंगल (Mars): इसे लाल ग्रह के नाम से जाना जाता है। बुध (Mercury): यह सबसे छोटा और सूर्य के सबसे नजदीक का ग्रह है। गुरु (Jupiter): इसे बृहस्पति भी कहते हैं और यह सबसे बड़ा ग्रह है। शुक्र (Venus): यह सौंदर्य और प्रेम का ग्रह माना जाता है। शनि (Saturn): इसे न्याय का देवता कहा जाता है। राहु (North Lunar Node): यह एक छाया ग्रह है। केतु (South Lunar Node): यह भी एक छाया ग्रह है। अब इनके हमारे जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को समझते हैं। 1. सूर्य (Sun) – आत्मा, पद और प्रतिष्ठा का कारक सूर्य को आत्मा का कारक माना जाता है। यह व्यक्ति के आत्मविश्वास, सरकारी पद, प्रतिष्ठा और पिता को दर्शाता है। अगर कुंडली में सूर्य मजबूत है, तो व्यक्ति को सफलता, यश और अधिकार मिलता है। कमजोर सूर्य आत्मविश्वास की कमी, नेत्र संबंधी समस्याएं और पद में बाधाएं ला सकता है। अपनी कुंडली की जानकारी और समस्या निवारण के लिए आज ही संपर्क करें ।